रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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परेशानी और ग़म की दुआएँ

दुआओं का बाग़
1 मिनट का पाठ
1
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ الْعَظِيمُ الْحَلِيمُ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَرَبُّ الْأَرْضِ وَرَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ

अर्थअल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, जो अज़मत वाला, बुर्दबार है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, जो अर्श-ए-अज़ीम का रब है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, जो आसमानों का रब, ज़मीन का रब और अर्श-ए-करीम का रब है।

स्रोत:मुत्तफ़क़ अलैह — बुख़ारी और मुस्लिम

2
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الْجُبْنِ وَالْبُخْلِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ غَلَبَةِ الدَّيْنِ وَقَهْرِ الرِّجَالِ

अर्थऐ अल्लाह! मैं फ़िक्र और ग़म से तेरी पनाह माँगता हूँ, बेबसी और सुस्ती से तेरी पनाह माँगता हूँ, बुज़दिली और कंजूसी से तेरी पनाह माँगता हूँ, और क़र्ज़ के बोझ तले दब जाने और लोगों के ग़लबे से तेरी पनाह माँगता हूँ।

स्रोत:बुख़ारी

3
لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ

अर्थतेरे सिवा कोई माबूद नहीं; तू पाक है। बेशक मैं ही ज़ालिमों में से था।

स्रोत:अल-अंबिया 21:87 — ज़ुन्नून की दुआ

4
حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ

अर्थहमें अल्लाह काफ़ी है, और वह सबसे बेहतर कारसाज़ है।

स्रोत:आले इमरान 3:173

5
اللَّهُمَّ رَحْمَتَكَ أَرْجُو فَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ، وَأَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ

अर्थऐ अल्लाह! मैं तेरी ही रहमत की उम्मीद रखता हूँ, तो मुझे पलक झपकने के बराबर भी मेरे नफ़्स के हवाले न कर। मेरे सारे काम दुरुस्त कर दे। तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।

स्रोत:अबू दाऊद (अल्बानी ने हसन कहा)

दुआओं का बाग़

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रिज़्क़ की दुआएँ

ऐ अल्लाह! अपने हलाल के ज़रिए मुझे अपने हराम से बचा कर काफ़ी कर दे, और अपने फ़ज़्ल से मुझे ऐसा बेनियाज़ कर दे कि मुझे तेरे सिवा किसी की ज़रूरत न रहे।

दुआओं का बाग़

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माँ-बाप के लिए दुआएँ

ऐ मेरे रब! उन दोनों पर रहम कर जैसे उन्होंने बचपन में मुझे पाला।

दुआओं का बाग़

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इस्तिग़फ़ार

ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है; तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ, और मैं अपनी ताक़त भर तेरे अहद और वादे पर क़ायम हूँ।