दुआओं का बाग़رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِअर्थऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा।
स्रोत:अल-बक़रह 2:201
رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِنْ نَسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا، رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِنْ قَبْلِنَا، رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِ، وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا، أَنْتَ مَوْلَانَا فَانْصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَअर्थऐ हमारे रब! अगर हम भूल जाएँ या ग़लती कर बैठें तो हमारी पकड़ न कर। ऐ हमारे रब! हम पर ऐसा बोझ न डाल जैसा तूने हमसे पहले के लोगों पर डाला था। ऐ हमारे रब! हम पर वह बोझ न डाल जिसकी हममें ताक़त नहीं। हमें माफ़ कर, हमें बख़्श दे और हम पर रहम कर। तू ही हमारा कारसाज़ है, तो काफ़िर लोगों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।
स्रोत:अल-बक़रह 2:286
رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً، إِنَّكَ أَنْتَ الْوَهَّابُअर्थऐ हमारे रब! हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर, और हमें अपने पास से रहमत अता कर। बेशक तू ही बहुत अता करने वाला है।
स्रोत:आले इमरान 3:8
رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِअर्थऐ हमारे रब! हम ईमान ले आए, तो हमारे गुनाह बख़्श दे और हमें आग के अज़ाब से बचा।
स्रोत:आले इमरान 3:16
رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنْفُسَنَا وَإِنْ لَمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَअर्थऐ हमारे रब! हमने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया, और अगर तूने हमें न बख़्शा और हम पर रहम न किया तो हम ज़रूर घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।
स्रोत:अल-आराफ़ 7:23
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِنْ لِسَانِي يَفْقَهُوا قَوْلِيअर्थऐ मेरे रब! मेरा सीना मेरे लिए खोल दे, मेरा काम मेरे लिए आसान कर दे, और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे ताकि वे मेरी बात समझ सकें।
स्रोत:ताहा 20:25-28
رَبِّ زِدْنِي عِلْمًاअर्थऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा कर।
स्रोत:ताहा 20:114
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًاअर्थऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों और औलाद से आँखों की ठंडक अता कर, और हमें परहेज़गारों का पेशवा बना।
स्रोत:अल-फ़ुरक़ान 25:74
رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا، إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُअर्थऐ हमारे रब! हमसे [यह] क़बूल कर। बेशक तू ही सुनने वाला, जानने वाला है।
स्रोत:अल-बक़रह 2:127
رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَا، إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُअर्थऐ हमारे रब! और हमें अपना मुस्लिम [फ़रमाँबरदार] बना और हमारी औलाद में से भी एक मुस्लिम उम्मत [जो तेरी फ़रमाँबरदार हो]। और हमें हमारी [इबादत के] तरीक़े बता और हमारी तौबा क़बूल कर। बेशक तू ही तौबा क़बूल करने वाला, रहम करने वाला है।
स्रोत:अल-बक़रह 2:128
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَअर्थऐ हमारे रब! हम पर सब्र उंडेल दे और हमारे क़दम जमा दे और काफ़िर लोगों पर हमें फ़तह दे।
स्रोत:अल-बक़रह 2:250
رَبَّنَا إِنَّكَ جَامِعُ النَّاسِ لِيَوْمٍ لَّا رَيْبَ فِيهِ، إِنَّ اللَّهَ لَا يُخْلِفُ الْمِيعَادَअर्थऐ हमारे रब! बेशक तू लोगों को एक ऐसे दिन के लिए जमा करेगा जिसमें कोई शक नहीं। बेशक अल्लाह अपने वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता।"
स्रोत:आल-ए-इमरान 3:9
رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً، إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِअर्थऐ मेरे रब! मुझे अपने पास से नेक औलाद अता कर। बेशक तू ही दुआ सुनने वाला है।
स्रोत:आल-ए-इमरान 3:38
رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلْتَ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَअर्थऐ हमारे रब! तूने जो उतारा हम उस पर ईमान लाए और हमने रसूल [यानी ईसा] की पैरवी की, तो हमें [हक़ की] गवाही देने वालों में लिख ले।"
स्रोत:आल-ए-इमरान 3:53
رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِي أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَअर्थऐ हमारे रब! हमारे गुनाह और हमारे कामों में [हुई] ज़्यादतियाँ माफ़ कर दे और हमारे क़दम जमा दे और काफ़िर लोगों पर हमें फ़तह दे।
स्रोत:आल-ए-इमरान 3:147
رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَاطِلًا سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِअर्थऐ हमारे रब! तूने यह बेमक़सद पैदा नहीं किया; तू [ऐसी बात से] पाक है; तो हमें आग के अज़ाब से बचा।
स्रोत:आल-ए-इमरान 3:191
رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ، وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍअर्थऐ हमारे रब! बेशक जिसे तूने आग में दाख़िल किया - उसे तूने रुसवा कर दिया, और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं।
स्रोत:आल-ए-इमरान 3:192
رَبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلْإِيمَانِ أَنْ آمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا، رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْأَبْرَارِअर्थऐ हमारे रब! बेशक हमने एक पुकारने वाले [यानी पैग़ंबर मुहम्मद (ﷺ)] को ईमान की ओर पुकारते सुना, [कि] 'अपने रब पर ईमान लाओ,' तो हम ईमान ले आए। ऐ हमारे रब! तो हमारे गुनाह बख़्श दे और हमारी बुराइयाँ हमसे दूर कर दे और हमें नेक लोगों के साथ मौत दे।
स्रोत:आल-ए-इमरान 3:193
رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ، إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَअर्थऐ हमारे रब! और हमें वह अता कर जिसका तूने अपने रसूलों के ज़रिए हमसे वादा किया है और क़यामत के दिन हमें रुसवा न कर। बेशक तू [अपने] वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता।"
स्रोत:आल-ए-इमरान 3:194
رَبَّنَا آمَنَّا فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَअर्थऐ हमारे रब! हम ईमान ले आए, तो हमें गवाही देने वालों में लिख ले।
स्रोत:अल-माइदह 5:83
رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَअर्थऐ हमारे रब! हमें ज़ालिम लोगों के साथ न कर।
स्रोत:अल-आराफ़ 7:47
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَअर्थऔर तू हमसे सिर्फ़ इस बात का बदला ले रहा है कि हम अपने रब की निशानियों पर ईमान ले आए जब वे हमारे पास आईं। ऐ हमारे रब! हम पर सब्र उंडेल दे और हमें मुस्लिम [तेरा फ़रमाँबरदार] बनाकर मौत दे।"
स्रोत:अल-आराफ़ 7:126
رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِرِينَअर्थहमने अल्लाह ही पर भरोसा किया। ऐ हमारे रब! हमें ज़ालिम लोगों के लिए आज़माइश [का ज़रिया] न बना और अपनी रहमत से हमें काफ़िर लोगों से नजात दे।
स्रोत:यूनुस 10:85-86
رَبِّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْأَلَكَ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ، وَإِلَّا تَغْفِرْ لِي وَتَرْحَمْنِي أَكُن مِّنَ الْخَاسِرِينَअर्थऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ इस बात से कि तुझसे वह माँगूँ जिसका मुझे इल्म नहीं। और अगर तूने मुझे न बख़्शा और मुझ पर रहम न किया तो मैं घाटा उठाने वालों में से हो जाऊँगा।
स्रोत:हूद 11:47
رَبِّ قَدْ آتَيْتَنِي مِنَ الْمُلْكِ وَعَلَّمْتَنِي مِن تَأْوِيلِ الْأَحَادِيثِ، فَاطِرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ أَنتَ وَلِيِّي فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ، تَوَفَّنِي مُسْلِمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَअर्थऐ मेरे रब! तूने मुझे हुकूमत में से [हिस्सा] दिया और ख़्वाबों की ताबीर का इल्म सिखाया। ऐ आसमानों और ज़मीन के पैदा करने वाले, दुनिया और आख़िरत में तू ही मेरा कारसाज़ है। मुझे मुस्लिम होने की हालत में मौत दे और मुझे नेक लोगों में शामिल कर।"
स्रोत:यूसुफ़ 12:101
رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِن ذُرِّيَّتِي، رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُअर्थऐ मेरे रब! मुझे नमाज़ क़ायम करने वाला बना, और मेरी औलाद में से [बहुतों को] भी। ऐ हमारे रब! और मेरी दुआ क़बूल कर। ऐ हमारे रब! मुझे और मेरे माँ-बाप को और ईमान वालों को उस दिन बख़्श दे जिस दिन हिसाब क़ायम होगा।"
स्रोत:इब्राहीम 14:40-41
رَبِّ ارْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَانِي صَغِيرًاअर्थऐ मेरे रब! उन दोनों पर रहम कर जैसे उन्होंने बचपन में मुझे पाला।
स्रोत:अल-इसरा 17:24
رَبِّ أَدْخِلْنِي مُدْخَلَ صِدْقٍ وَأَخْرِجْنِي مُخْرَجَ صِدْقٍ وَاجْعَل لِّي مِن لَّدُنكَ سُلْطَانًا نَّصِيرًاअर्थऐ मेरे रब! मुझे सच्चाई के साथ दाख़िल कर और सच्चाई के साथ निकाल और अपने पास से मुझे मदद करने वाली क़ुव्वत अता कर।
स्रोत:अल-इसरा 17:80
رَبَّنَا آتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًاअर्थऐ हमारे रब! हमें अपने पास से रहमत अता कर और हमारे मामले में हमारे लिए सही रहनुमाई का इंतज़ाम कर दे।
स्रोत:अल-कहफ़ 18:10
أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَअर्थबेशक मुझे तकलीफ़ पहुँची है, और तू सब रहम करने वालों से बढ़कर रहम करने वाला है।
स्रोत:अल-अंबिया 21:83
لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَअर्थतेरे सिवा कोई माबूद नहीं; तू पाक है। बेशक मैं ही ज़ालिमों में से था।
स्रोत:अल-अंबिया 21:87
رَبِّ لَا تَذَرْنِي فَرْدًا وَأَنتَ خَيْرُ الْوَارِثِينَअर्थऐ मेरे रब! मुझे अकेला न छोड़ [बिना वारिस के], और तू सबसे बेहतर वारिस है।
स्रोत:अल-अंबिया 21:89
رَبِّ أَنزِلْنِي مُنزَلًا مُّبَارَكًا وَأَنتَ خَيْرُ الْمُنزِلِينَअर्थऔर कहो, 'ऐ मेरे रब! मुझे बरकत वाली जगह उतार, और तू सबसे बेहतर उतारने वाला है।'"
स्रोत:अल-मोमिनून 23:29
رَبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحْضُرُونِअर्थऐ मेरे रब! मैं शैतानों के वसवसों से तेरी पनाह माँगता हूँ, और ऐ मेरे रब! मैं इस बात से भी तेरी पनाह माँगता हूँ कि वे मेरे पास आएँ।
स्रोत:अल-मोमिनून 23:97-98
رَبَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَअर्थबेशक मेरे बंदों में एक गिरोह था जो कहता था, 'ऐ हमारे रब! हम ईमान लाए, तो हमें बख़्श दे और हम पर रहम कर, और तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।'
स्रोत:अल-मोमिनून 23:109
رَبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَअर्थऐ मेरे रब! बख़्श दे और रहम कर, और तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।
स्रोत:अल-मोमिनून 23:118
رَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَ، إِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا إِنَّهَا سَاءَتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًاअर्थऐ हमारे रब! हमसे जहन्नम का अज़ाब फेर दे। बेशक उसका अज़ाब चिमट जाने वाला है; बेशक वह ठहरने और रहने की बहुत बुरी जगह है।
स्रोत:अल-फ़ुरक़ान 25:65-66
رَبِّ هَبْ لِي حُكْمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ وَاجْعَل لِّي لِسَانَ صِدْقٍ فِي الْآخِرِينَ وَاجْعَلْنِي مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعِيمِअर्थ[और उन्होंने कहा], "ऐ मेरे रब! मुझे हुक्म [इल्म व हिकमत] अता कर और मुझे नेक लोगों में शामिल कर। और बाद में आने वाली नस्लों में मेरा अच्छा ज़िक्र [यानी नेक नामी] जारी रख। और मुझे नेमतों वाली जन्नत के वारिसों में से बना।
स्रोत:अश-शुअरा 26:83-85
رَبِّ أَوْزِعْنِي أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَ الَّتِي أَنْعَمْتَ عَلَيَّ وَعَلَىٰ وَالِدَيَّ وَأَنْ أَعْمَلَ صَالِحًا تَرْضَاهُ وَأَدْخِلْنِي بِرَحْمَتِكَ فِي عِبَادِكَ الصَّالِحِينَअर्थऐ मेरे रब! मुझे तौफ़ीक़ दे कि मैं तेरी उस नेमत का शुक्र अदा करूँ जो तूने मुझ पर और मेरे माँ-बाप पर की है और ऐसे नेक काम करूँ जिनसे तू राज़ी हो। और अपनी रहमत से मुझे अपने नेक बंदों [की सफ़ों] में दाख़िल कर।
स्रोत:अन-नम्ल 27:19
رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي فَاغْفِرْ لِيअर्थऐ मेरे रब! बेशक मैंने अपने आप पर ज़ुल्म किया, तो मुझे बख़्श दे।
स्रोत:अल-क़सस 28:16
رَبِّ نَجِّنِي مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَअर्थऐ मेरे रब! मुझे ज़ालिम लोगों से नजात दे।
स्रोत:अल-क़सस 28:21
رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌअर्थऐ मेरे रब! तू जो भी भलाई मुझ पर उतारे, बेशक मैं उसका मोहताज हूँ।
स्रोत:अल-क़सस 28:24
رَبِّ انصُرْنِي عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِدِينَअर्थऐ मेरे रब! फ़साद करने वाले लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद कर।
स्रोत:अल-अनकबूत 29:30
رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَअर्थऐ मेरे रब! मुझे नेक लोगों में से [एक औलाद] अता कर।"
स्रोत:अस-साफ़्फ़ात 37:100
رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَبِيلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَحِيمِअर्थऐ हमारे रब! तूने हर चीज़ को रहमत और इल्म से घेर रखा है, तो उन लोगों को बख़्श दे जिन्होंने तौबा की और तेरे रास्ते पर चले और उन्हें जहन्नम के अज़ाब से बचा।
स्रोत:ग़ाफ़िर 40:7
رَبِّ أَوْزِعْنِي أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَ الَّتِي أَنْعَمْتَ عَلَيَّ وَعَلَىٰ وَالِدَيَّ وَأَنْ أَعْمَلَ صَالِحًا تَرْضَاهُ وَأَصْلِحْ لِي فِي ذُرِّيَّتِي، إِنِّي تُبْتُ إِلَيْكَ وَإِنِّي مِنَ الْمُسْلِمِينَअर्थऐ मेरे रब! मुझे तौफ़ीक़ दे कि मैं तेरी उस नेमत का शुक्र अदा करूँ जो तूने मुझ पर और मेरे माँ-बाप पर की है और ऐसे नेक अमल करूँ जिनसे तू राज़ी हो और मेरे लिए मेरी औलाद को नेक बना दे। बेशक मैंने तेरी ओर तौबा की, और बेशक मैं मुसलमानों में से हूँ।
स्रोत:अल-अहक़ाफ़ 46:15
رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ وَلَا تَجْعَلْ فِي قُلُوبِنَا غِلًّا لِّلَّذِينَ آمَنُوا رَبَّنَا إِنَّكَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌअर्थऐ हमारे रब! हमें और हमारे उन भाइयों को बख़्श दे जो ईमान में हमसे पहले गुज़र गए और हमारे दिलों में ईमान वालों के लिए [कोई] कीना न रख। ऐ हमारे रब! बेशक तू बड़ा शफ़क़त करने वाला, रहम करने वाला है।
स्रोत:अल-हश्र 59:10
رَبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُअर्थबेशक हम तुमसे और अल्लाह के सिवा जिनकी तुम इबादत करते हो उन सबसे बेज़ार हैं। हमने तुम्हारा इनकार किया, और हमारे और तुम्हारे बीच हमेशा के लिए दुश्मनी और नफ़रत ज़ाहिर हो चुकी है जब तक कि तुम अकेले अल्लाह पर ईमान न ले आओ" - सिवाय इब्राहीम की उस बात के जो उन्होंने अपने पिता से कही।
स्रोत:अल-मुमतहिनह 60:4
رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا، إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُअर्थऐ हमारे रब! हमें काफ़िरों के लिए अज़ाब [का निशाना] न बना और हमें बख़्श दे, ऐ हमारे रब! बेशक तू ही ज़बरदस्त, हिकमत वाला है।"
स्रोत:अल-मुमतहिनह 60:5
رَبَّنَا أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَا، إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌअर्थऐ हमारे रब! हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर दे और हमें बख़्श दे। बेशक तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है।
स्रोत:अत-तहरीम 66:8
رَبِّ اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِيَ مُؤْمِنًا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ وَلَا تَزِدِ الظَّالِمِينَ إِلَّا تَبَارًاअर्थऐ मेरे रब! मुझे और मेरे माँ-बाप को और जो ईमान वाला होकर मेरे घर में दाख़िल हो उसे और ईमान वाले मर्दों और ईमान वाली औरतों को बख़्श दे। और ज़ालिमों को तबाही के सिवा किसी चीज़ में न बढ़ा।"
स्रोत:नूह 71:28

