नमाज़ कैसे पढ़ें1तकबीर-ए-तहरीमा
वह क़िबले की ओर मुँह करता है और दिल में नमाज़ की नीयत करता है, फिर अपने हाथ कंधों के बराबर उठाकर तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहता है।
اللَّهُ أَكْبَرُ2शुरुआत की दुआ (दुआ-ए-इस्तिफ़्ताह / सना)
वह अपना दायाँ हाथ बाएँ हाथ के ऊपर सीने पर रखता है, फिर धीरे से शुरुआत की दुआ पढ़ता है।
سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَى جَدُّكَ، وَلَا إِلَهَ غَيْرُكَ3तअव्वुज़ और बिस्मिल्लाह
वह अल-फ़ातिहा पढ़ने से पहले धीरे से शैतान से पनाह माँगता है (तअव्वुज़) और बिस्मिल्लाह पढ़ता है।
أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ، بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ4अल-फ़ातिहा पढ़ना
वह सूरह अल-फ़ातिहा पढ़ता है, जो हर रकअत में रुक्न (फ़र्ज़ हिस्सा) है, फिर पहली दो रकअतों में क़ुरआन में से जो आसान हो पढ़ता है, और उसके बाद कहता है: आमीन।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ، الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ، الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ، مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ، إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ، اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ، صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ5रुकू और उसकी तस्बीह
वह अपने हाथ उठाता है, तकबीर कहता है और रुकू करता है, अपनी हथेलियाँ घुटनों पर रखता है और पीठ को सीधा बराबर रखता है, और तीन बार अल्लाह की तस्बीह करता है।
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ6रुकू से उठना
वह अपना सिर उठाता है, साथ ही अपने हाथ भी उठाता है, और तस्मीअ (समिअल्लाहु लिमन हमिदह) कहता है, और जब सीधा खड़ा हो जाता है तो तहमीद (रब्बना व लकल-हम्द) कहता है।
سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ، رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ7सजदा और उसकी तस्बीह
वह तकबीर कहता है और सात अंगों पर सजदा करता है (माथा और नाक, दोनों हथेलियाँ, दोनों घुटने, और पैरों की उंगलियों के सिरे), तीन बार अल्लाह की तस्बीह करता है, और ख़ूब दुआ करता है।
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى8दोनों सजदों के बीच बैठना
वह तकबीर कहते हुए सजदे से उठता है, इफ़्तिराश की हालत में बैठता है और दुआ करता है, फिर पहले सजदे की तरह दूसरा सजदा करता है।
رَبِّ اغْفِرْ لِي، رَبِّ اغْفِرْ لِي9तशह्हुद
पहली दो रकअतों के बाद और नमाज़ के आख़िर में, वह तशह्हुद के लिए बैठता है, शहादत की उंगली से इशारा करता है, और अत्तहिय्यात पढ़ता है।
التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ10दरूद-ए-इब्राहीमी (अस-सलात अल-इब्राहीमिय्या)
आख़िरी तशह्हुद में वह नबी ﷺ पर दरूद भेजता है, फिर सलाम (नमाज़ ख़त्म करने का सलाम) से पहले जो चाहे दुआ करता है।
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ11सलाम (नमाज़ ख़त्म करने का सलाम)
वह सलाम के साथ नमाज़ ख़त्म करता है, पहले अपनी दाईं ओर फिर बाईं ओर मुड़ते हुए।
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ


