रुक़्याالٓمٓ ذَٰلِكَ ٱلْكِتَـٰبُ لَا رَيْبَ فِيهِ هُدًى لِّلْمُتَّقِينَ ٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِٱلْغَيْبِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ يُنفِقُونَ وَٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ وَبِٱلْـَٔاخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ أُولَـٰٓئِكَ عَلَىٰ هُدًى مِّن رَّبِّهِمْ وَأُولَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَअर्थअलिफ़, लाम, मीम। यह वह किताब है जिसमें कोई शक नहीं, परहेज़गारों के लिए हिदायत है — जो ग़ैब पर ईमान लाते हैं, नमाज़ क़ायम करते हैं, और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से ख़र्च करते हैं; और जो उस पर ईमान लाते हैं जो तुम पर उतारा गया और जो तुमसे पहले उतारा गया, और आख़िरत पर यक़ीन रखते हैं। यही लोग अपने रब की ओर से हिदायत पर हैं, और यही कामयाब होने वाले हैं।
स्रोत:अल-बक़रह 2:1-5

