रुक़्याقُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ مَلِكِ ٱلنَّاسِ إِلَـٰهِ ٱلنَّاسِ مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِअर्थकहो: मैं इंसानों के रब की पनाह माँगता हूँ, इंसानों के बादशाह की, इंसानों के माबूद की, उस वसवसा डालने वाले की बुराई से जो पीछे हट जाता है, जो इंसानों के सीनों में वसवसा डालता है, जिन्नों में से हो या इंसानों में से।
स्रोत:अन-नास 114:1-6

