रुक़्याقُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّـٰثَـٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَअर्थकहो: मैं सुबह के रब की पनाह माँगता हूँ, उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से, और अँधेरे की बुराई से जब वह छा जाए, और गिरहों में फूँकने वालियों की बुराई से, और हसद करने वाले की बुराई से जब वह हसद करे।
स्रोत:अल-फ़लक़ 113:1-5

