रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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सफ़र की दुआएँ

दुआओं का बाग़
1 मिनट का पाठ
1
سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ. اللَّهُمَّ إِنَّا نَسْأَلُكَ فِي سَفَرِنَا هَذَا الْبِرَّ وَالتَّقْوَىٰ، وَمِنَ الْعَمَلِ مَا تَرْضَىٰ، اللَّهُمَّ هَوِّنْ عَلَيْنَا سَفَرَنَا هَذَا وَاطْوِ عَنَّا بُعْدَهُ، اللَّهُمَّ أَنْتَ الصَّاحِبُ فِي السَّفَرِ، وَالْخَلِيفَةُ فِي الْأَهْلِ، اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ، وَكَآبَةِ الْمَنْظَرِ، وَسُوءِ الْمُنْقَلَبِ فِي الْمَالِ وَالْأَهْلِ

अर्थपाक है वह जिसने इसे हमारे बस में कर दिया, वरना हम ख़ुद इसे क़ाबू में नहीं ला सकते थे, और बेशक हम अपने रब ही की ओर लौटने वाले हैं। ऐ अल्लाह! हम अपने इस सफ़र में तुझसे नेकी, तक़वा और ऐसे अमल माँगते हैं जिनसे तू राज़ी हो। ऐ अल्लाह! हमारे इस सफ़र को हम पर आसान कर दे और इसकी दूरी को समेट दे। ऐ अल्लाह! तू ही सफ़र में साथी है और घर वालों का निगहबान है। ऐ अल्लाह! मैं सफ़र की मशक़्क़त से, दुखभरे मंज़र से, और माल और घर वालों में बुरे अंजाम से तेरी पनाह माँगता हूँ।

स्रोत:मुस्लिम

2
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ، وَكَآبَةِ الْمُنْقَلَبِ، وَالْحَوْرِ بَعْدَ الْكَوْرِ، وَدَعْوَةِ الْمَظْلُومِ، وَسُوءِ الْمَنْظَرِ فِي الْأَهْلِ وَالْمَالِ

अर्थऐ अल्लाह! मैं सफ़र की मशक़्क़त से, दुखभरी वापसी से, तरक़्क़ी के बाद ज़वाल से, मज़लूम की बद्दुआ से, और घर वालों और माल में बुरे मंज़र से तेरी पनाह माँगता हूँ।

स्रोत:मुस्लिम

3
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ

अर्थमैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमात के ज़रिए उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से पनाह माँगता हूँ।

स्रोत:मुस्लिम

दुआओं का बाग़

12 मिनट का पाठ

क़ुरआनी दुआएँ

ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा।

दुआओं का बाग़

1 मिनट का पाठ

परेशानी और ग़म की दुआएँ

अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, जो अज़मत वाला, बुर्दबार है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, जो अर्श-ए-अज़ीम का रब है।

दुआओं का बाग़

1 मिनट का पाठ

रिज़्क़ की दुआएँ

ऐ अल्लाह! अपने हलाल के ज़रिए मुझे अपने हराम से बचा कर काफ़ी कर दे, और अपने फ़ज़्ल से मुझे ऐसा बेनियाज़ कर दे कि मुझे तेरे सिवा किसी की ज़रूरत न रहे।