रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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मसनून दुआएँ

दुआओं का बाग़
1 मिनट का पाठ
1
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْهُدَىٰ وَالتُّقَىٰ وَالْعَفَافَ وَالْغِنَىٰ

अर्थऐ अल्लाह! मैं तुझसे हिदायत, तक़वा, पाकदामनी और बेनियाज़ी माँगता हूँ।

स्रोत:मुस्लिम

2
اللَّهُمَّ أَصْلِحْ لِي دِينِي الَّذِي هُوَ عِصْمَةُ أَمْرِي، وَأَصْلِحْ لِي دُنْيَايَ الَّتِي فِيهَا مَعَاشِي، وَأَصْلِحْ لِي آخِرَتِي الَّتِي فِيهَا مَعَادِي، وَاجْعَلِ الْحَيَاةَ زِيَادَةً لِي فِي كُلِّ خَيْرٍ، وَاجْعَلِ الْمَوْتَ رَاحَةً لِي مِنْ كُلِّ شَرٍّ

अर्थऐ अल्लाह! मेरे दीन को मेरे लिए दुरुस्त कर दे, जो मेरे मामलों की हिफ़ाज़त है; मेरी दुनिया को मेरे लिए दुरुस्त कर दे, जिसमें मेरी रोज़ी है; और मेरी आख़िरत को मेरे लिए दुरुस्त कर दे, जिसकी ओर मुझे लौटना है। ज़िंदगी को मेरे लिए हर भलाई में इज़ाफ़े का ज़रिया बना, और मौत को मेरे लिए हर बुराई से राहत बना दे।

स्रोत:मुस्लिम

3
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ

अर्थऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ और आग से तेरी पनाह माँगता हूँ।

स्रोत:अबू दाऊद और इब्न माजह (सहीह)

4
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَافِيَةَ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ

अर्थऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया और आख़िरत में आफ़ियत माँगता हूँ।

स्रोत:इब्न माजह और तिर्मिज़ी (हसन)

5
يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَىٰ دِينِكَ

अर्थऐ दिलों को फेरने वाले! मेरे दिल को अपने दीन पर जमा दे।

स्रोत:तिर्मिज़ी (सहीह)

6
اللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَىٰ ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ

अर्थऐ अल्लाह! अपने ज़िक्र, अपने शुक्र और अपनी अच्छी इबादत पर मेरी मदद कर।

स्रोत:अबू दाऊद और नसाई (सहीह)

दुआओं का बाग़

2 मिनट का पाठ

सुबह और शाम की दुआएँ

हमने सुबह की और बादशाही अल्लाह ही की है। सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं; उसी की बादशाही है और उसी के लिए…

दुआओं का बाग़

1 मिनट का पाठ

इस्तिख़ारा की दुआ

ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म के ज़रिए तुझसे भलाई की रहनुमाई चाहता हूँ और तेरी क़ुदरत के ज़रिए तुझसे ताक़त माँगता हूँ, और तुझसे तेरे बड़े फ़ज़्ल का सवाल करता हूँ।

दुआओं का बाग़

1 मिनट का पाठ

सफ़र की दुआएँ

पाक है वह जिसने इसे हमारे बस में कर दिया, वरना हम ख़ुद इसे क़ाबू में नहीं ला सकते थे, और बेशक हम अपने रब ही की ओर लौटने वाले हैं।