रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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सुबह और शाम की दुआएँ

दुआओं का बाग़
2 मिनट का पाठ
1
أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، رَبِّ أَسْأَلُكَ خَيْرَ مَا فِي هَذَا الْيَوْمِ وَخَيْرَ مَا بَعْدَهُ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا فِي هَذَا الْيَوْمِ وَشَرِّ مَا بَعْدَهُ

अर्थहमने सुबह की और बादशाही अल्लाह ही की है। सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं; उसी की बादशाही है और उसी के लिए सारी तारीफ़ है, और वह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है। ऐ मेरे रब! मैं तुझसे इस दिन की भलाई और इसके बाद की भलाई माँगता हूँ, और इस दिन की बुराई और इसके बाद की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ।

स्रोत:मुस्लिम — शाम को कहें: أَمْسَيْنَا وَأَمْسَى الْمُلْكُ لِلَّهِ

2
اللَّهُمَّ بِكَ أَصْبَحْنَا، وَبِكَ أَمْسَيْنَا، وَبِكَ نَحْيَا، وَبِكَ نَمُوتُ، وَإِلَيْكَ النُّشُورُ

अर्थऐ अल्लाह! तेरे ही सहारे हमने सुबह की और तेरे ही सहारे शाम की, तेरे ही सहारे हम जीते हैं और तेरे ही सहारे मरते हैं, और तेरी ही ओर उठकर जाना है।

स्रोत:तिर्मिज़ी (हसन)

3
اللَّهُمَّ مَا أَصْبَحَ بِي مِنْ نِعْمَةٍ أَوْ بِأَحَدٍ مِنْ خَلْقِكَ فَمِنْكَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ، فَلَكَ الْحَمْدُ وَلَكَ الشُّكْرُ

अर्थऐ अल्लाह! आज सुबह मुझे या तेरी मख़लूक़ में से किसी को जो भी नेमत मिली है, वह सिर्फ़ तेरी ही ओर से है, तेरा कोई शरीक नहीं। तो तेरे ही लिए सारी तारीफ़ है और तेरा ही सारा शुक्र है।

स्रोत:अबू दाऊद (हसन)

4
اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُشْهِدُكَ وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ وَمَلَائِكَتَكَ وَجَمِيعَ خَلْقِكَ، أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ وَحْدَكَ لَا شَرِيكَ لَكَ، وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُكَ وَرَسُولُكَ

अर्थऐ अल्लाह! आज सुबह मैं तुझे गवाह बनाता हूँ, और तेरे अर्श के उठाने वालों, तेरे फ़रिश्तों और तेरी सारी मख़लूक़ को गवाह बनाता हूँ, कि तू ही अल्लाह है — तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई शरीक नहीं — और यह कि मुहम्मद तेरे बंदे और तेरे रसूल हैं।

स्रोत:अबू दाऊद और तिर्मिज़ी

दुआओं का बाग़

1 मिनट का पाठ

इस्तिख़ारा की दुआ

ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म के ज़रिए तुझसे भलाई की रहनुमाई चाहता हूँ और तेरी क़ुदरत के ज़रिए तुझसे ताक़त माँगता हूँ, और तुझसे तेरे बड़े फ़ज़्ल का सवाल करता हूँ।

दुआओं का बाग़

1 मिनट का पाठ

सफ़र की दुआएँ

पाक है वह जिसने इसे हमारे बस में कर दिया, वरना हम ख़ुद इसे क़ाबू में नहीं ला सकते थे, और बेशक हम अपने रब ही की ओर लौटने वाले हैं।

दुआओं का बाग़

12 मिनट का पाठ

क़ुरआनी दुआएँ

ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा।