रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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हुदैबिया की संधि

सीरत-ए-नबवी
मदनी दौर — 6 हिजरी1 मिनट का पाठ

नबी ﷺ अपने सहाबा के साथ उमरा करने के इरादे से निकले, लेकिन क़ुरैश ने उन्हें हुदैबिया में रोक दिया, तो दस साल के युद्धविराम के साथ एक संधि हुई। जब यह अफ़वाह फैली कि उस्मान को क़त्ल कर दिया गया है, तो सहाबा ने पेड़ के नीचे नबी से बैअत की — यह बैअत-ए-रिज़वान थी। हालाँकि संधि की शर्तें नाइंसाफ़ी भरी लगती थीं, अल्लाह ने इसे खुली जीत कहा, क्योंकि युद्धविराम के दौरान लोगों को अमन मिला और इस्लाम फैला।

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मक्का की फ़तह

जब क़ुरैश ने अपनी संधि तोड़ी, तो नबी ﷺ दस हज़ार मुसलमानों के साथ निकले और आठवें साल रमज़ान में बिना किसी उल्लेखनीय लड़ाई के मक्का फ़तह कर लिया।

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हज्जतुल-विदा और वफ़ात

नबी ﷺ ने दसवें साल हज्जतुल-विदा (विदाई हज) किया और अरफ़ात में लोगों को एक व्यापक ख़ुत्बा दिया, जिसमें आपने ख़ून, माल और लोगों के हक़ों की हुरमत (पवित्रता) को पक्का किया।

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जन्म और परवरिश

मुहम्मद ﷺ हाथी वाले साल (आमुल-फ़ील) में मक्का में क़ुरैश क़बीले के बनू हाशिम ख़ानदान में पैदा हुए।