सीरत-ए-नबवीअल्लाह अपने नबी ﷺ को रात में मस्जिद-ए-हराम से मस्जिद-ए-अक़्सा तक ले गया, फिर आपको सबसे ऊँचे आसमानों पर ले जाया गया। आपने अपने रब की बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखीं, और उसी रात आप पर पाँच वक़्त की नमाज़ें फ़र्ज़ की गईं। यह ग़म के साल (आमुल-हुज़्न) के बाद नबी ﷺ के लिए ताक़त का ज़रिया बना, जिस साल आपने अपनी पत्नी ख़दीजा और अपने चाचा अबू तालिब को खो दिया था।

