सीरत-ए-नबवीजब क़ुरैश का ज़ुल्म बढ़ गया, तो नबी ﷺ ने अपने कुछ सहाबा को हबशा (अबीसीनिया) की ओर हिजरत करने की इजाज़त दी, जहाँ एक इंसाफ़ पसंद बादशाह था जिसके यहाँ किसी पर ज़ुल्म नहीं होता था। उन्होंने दो बार में हिजरत की, और जब क़ुरैश ने उन्हें वापस माँगने के लिए किसी को भेजा तो वे नजाशी के सामने अपने दीन पर डटे रहे। नजाशी ने सूरह मरयम से ईसा और मरयम के बारे में आयतें सुनने के बाद उनकी हिफ़ाज़त की।

