रुक़्याءَامَنَ ٱلرَّسُولُ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِ مِن رَّبِّهِ وَٱلْمُؤْمِنُونَ كُلٌّ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَمَلَـٰٓئِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِّن رُّسُلِهِ وَقَالُوا سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا غُفْرَانَكَ رَبَّنَا وَإِلَيْكَ ٱلْمَصِيرُ لَا يُكَلِّفُ ٱللَّهُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا لَهَا مَا كَسَبَتْ وَعَلَيْهَا مَا ٱكْتَسَبَتْ رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِن نَّسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِنَا رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِ وَٱعْفُ عَنَّا وَٱغْفِرْ لَنَا وَٱرْحَمْنَا أَنتَ مَوْلَىٰنَا فَٱنصُرْنَا عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَـٰفِرِينَअर्थरसूल उस पर ईमान लाया जो उसके रब की ओर से उस पर उतारा गया, और ईमान वाले भी। हर एक अल्लाह पर, उसके फ़रिश्तों पर, उसकी किताबों पर और उसके रसूलों पर ईमान लाया: हम उसके रसूलों में से किसी के बीच फ़र्क़ नहीं करते। और उन्होंने कहा: हमने सुना और हमने इताअत की। ऐ हमारे रब! हम तेरी बख़्शिश चाहते हैं; और तेरी ही ओर लौटना है। अल्लाह किसी जान पर उसकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डालता: उसने जो कमाया वह उसी के लिए है और जो बुराई उसने कमाई वह उसी पर है। ऐ हमारे रब! अगर हम भूल जाएँ या ग़लती कर बैठें तो हमारी पकड़ न कर। ऐ हमारे रब! हम पर ऐसा बोझ न डाल जैसा तूने हमसे पहले के लोगों पर डाला था। ऐ हमारे रब! हम पर वह बोझ न डाल जिसकी हममें ताक़त नहीं। हमें माफ़ कर, हमें बख़्श दे और हम पर रहम कर। तू ही हमारा कारसाज़ है, तो काफ़िर लोगों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।
स्रोत:अल-बक़रह 2:285-286

