रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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सूरह अल-फ़ातिहा

रुक़्या
1 मिनट का पाठ
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ مَـٰلِكِ يَوْمِ ٱلدِّينِ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ ٱهْدِنَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ صِرَٰطَ ٱلَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ ٱلْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا ٱلضَّآلِّينَ

अर्थअल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम करने वाला है। सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है जो सारे जहानों का रब है, बड़ा मेहरबान, निहायत रहम करने वाला, बदले के दिन का मालिक। हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझी से मदद माँगते हैं। हमें सीधा रास्ता दिखा — उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम किया, न उनका जिन पर ग़ज़ब हुआ, और न उनका जो गुमराह हुए।

स्रोत:अल-फ़ातिहा 1:1-7

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