स्तंभ और फ़िक़्हजो व्यक्ति क़ुर्बानी (उज़्हिया) का इरादा रखता हो, ज़ुल-हिज्जा का महीना शुरू होते ही वह क़ुर्बानी करने तक अपने बालों, नाख़ूनों या त्वचा से कुछ भी लेने से रुका रहे, पैग़ंबर ﷺ के इस फ़रमान के कारण: «إذا أُهِلَّ هلالُ ذي الحجة فلا يأخذنّ من شعره ولا من أظفاره شيئاً حتى يُضحّي»। यह केवल क़ुर्बानी करने वाले के लिए ख़ास है, उन लोगों के लिए नहीं जिनकी ओर से क़ुर्बानी की जा रही है।
स्रोत:حديث أم سلمة، رواه مسلم؛ وفتوى ابن باز [خلاف: الجمهور على الكراهة، والحنابلة على التحريم]

