स्तंभ और फ़िक़्हक़ुर्बानी करने वाले के लिए मुस्तहब है कि वह अपनी क़ुर्बानी में से खाए, कुछ तोहफ़े में दे, और कुछ ग़रीबों को सदक़ा करे; और सबसे अच्छा है कि इसे तीन हिस्सों में बाँटे: एक तिहाई ख़ुद खाए, एक तिहाई तोहफ़े में दे, और एक तिहाई सदक़ा करे। यह बँटवारा मुस्तहब है, फ़र्ज़ नहीं, इसलिए यदि वह पूरा खा ले या उसका अधिकांश सदक़ा कर दे, तब भी यह उसके लिए काफ़ी होगा।
स्रोत:الحج: 28؛ وفتوى ابن باز

