तजवीद के नियमरा पुर (मुफ़ख़्ख़म) पढ़ा जाता है जब उस पर फ़तहा या ज़म्मा हो, या जब वह फ़तहा या ज़म्मा के बाद साकिन हो। वह बारीक (मुरक़्क़क़) पढ़ा जाता है जब उस पर कसरा हो, या जब वह असली कसरा के बाद साकिन हो और उसके बाद इस्तिअला (ऊँचाई) का कोई अक्षर न आए।
تفخيم: رَبِّ، الْقُرْآنَ — ترقيق: رِجَالٌ، فِرْعَوْنَस्रोत:تحفة الأطفال

