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من حفظ عشر آيات من أول سورة الكهف عصم من الدجال، والاستعاذة بالله من فتنته عقب التشهد الأخير من كل صلاة.
जो सूरह अल-कहफ़ की पहली दस आयतें याद कर ले वह दज्जाल से महफ़ूज़ रहेगा। और हर नमाज़ में आख़िरी तशह्हुद के बाद उसके फ़ितने से अल्लाह की पनाह माँगना (भी हिफ़ाज़त है)।
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