रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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क़ब्रों की ज़ियारत की दुआ

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    السلام عليكم أهل الديار، من المؤمنين والمسلمين، وإنا إن شاء الله بكم لاحقون، [ويرحم الله المستقدمين منا والمستأخرين] أسال الله لنا ولكم العافية.

    ऐ इन घरों के रहने वाले मोमिनो और मुसलमानो, तुम पर सलामती हो। अगर अल्लाह ने चाहा तो हम भी तुमसे मिलने वाले हैं। [अल्लाह हममें से पहले जाने वालों और बाद में आने वालों पर रहम फ़रमाए।] मैं अल्लाह से अपने लिए और तुम्हारे लिए आफ़ियत माँगता हूँ।

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