रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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ताज़ियत (शोक संवेदना) की दुआ

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    إن لله ما أخذ، وله ما أعطى، وكل شيء عنده بأجل مسمى... فلتصبر ولتحتسب)). وإن قال: ((أعظم الله أجرك، وأحسن عزاءك، وغفر لميتك فحسن.

    "अल्लाह ही का है जो उसने ले लिया, और उसी का है जो उसने दिया; और उसके पास हर चीज़ का एक मुक़र्रर वक़्त है। तो वह सब्र करे और सवाब की उम्मीद रखे।" और अगर वह कहे: "अल्लाह तुम्हारा अज्र बढ़ाए, तुम्हें अच्छा सब्र (तसल्ली) दे, और तुम्हारे मरहूम को बख़्श दे" — तो यह भी ठीक है।

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