रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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जनाज़े की नमाज़ में मृतक के लिए दुआ

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    اللهم اغفر له وارحمه، وعافه، واعف عنه، وأكرم نزله، ووسع مدخله، واغسله بالماء والثلج والبرد، ونقه من الخطايا كما نقيت الثوب الأبيض من الدنس، وأبدله دارا خيرا من داره، وأهلا خيرا من أهله، وزوجا خيرا من زوجه، وأدخله الجنة، وأعذه من عذاب القبر [وعذاب النار].

    ऐ अल्लाह, उसे माफ़ कर दे और उस पर रहम कर, उसे आफ़ियत दे और उसे माफ़ कर दे, उसकी मेहमानी इज़्ज़त वाली कर और उसके दाख़िले की जगह कुशादा कर दे; उसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे, और उसे गुनाहों से ऐसा पाक कर दे जैसे सफ़ेद कपड़ा मैल से पाक किया जाता है, और उसे उसके घर से बेहतर घर, उसके घरवालों से बेहतर घरवाले, और उसके जीवनसाथी से बेहतर जीवनसाथी दे; उसे जन्नत में दाख़िल कर और उसे क़ब्र के अज़ाब [और आग के अज़ाब] से बचा।

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    اللهم اغفر لحينا وميتنا، وشاهدنا وغائبنا، وصغيرنا وكبيرنا، وذكرنا وأنثانا. اللهم من أحييته منا فأحيه على الإسلام، ومن توفيته منا فتوفه على الإيمان، اللهم لا تحرمنا أجره، ولا تضلنا بعده.

    ऐ अल्लाह, हमारे ज़िंदों और हमारे मुर्दों को, हमारे हाज़िर और हमारे ग़ायब लोगों को, हमारे छोटों और हमारे बड़ों को, हमारे मर्दों और हमारी औरतों को माफ़ कर दे। ऐ अल्लाह, हममें से जिसे तू ज़िंदा रखे उसे इस्लाम पर ज़िंदा रख, और हममें से जिसे तू मौत दे उसे ईमान पर मौत दे। ऐ अल्लाह, हमें उसके सवाब से महरूम न कर, और उसके बाद हमें गुमराह न कर।

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    اللهم إن فلان بن فلان في ذمتك، وحبل جوارك، فقه من فتنة القبر، وعذاب النار، وأنت أهل الوفاء والحق، فاغفر له وارحمه إنك أنت الغفور الرحيم.

    ऐ अल्लाह, फ़लाँ बिन फ़लाँ तेरी ज़िम्मेदारी में और तेरी पनाह की रस्सी में है, तो उसे क़ब्र के फ़ितने और आग के अज़ाब से बचा; तू वादा पूरा करने वाला और हक़ वाला है। उसे बख़्श दे और उस पर रहम फ़रमा; बेशक तू बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम करने वाला है।

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    اللهم عبدك وابن أمتك احتاج إلى رحمتك، وأنت غني عن عذابه، إن كان محسنا فزد في حسناته، وإن كان مسيئا فتجاوز عنه.

    ऐ अल्लाह, तेरा बंदा और तेरी बंदी का बेटा तेरी रहमत का मोहताज है, और तू उसे अज़ाब देने से बेनियाज़ है। अगर वह नेक था तो उसकी नेकियों में इज़ाफ़ा फ़रमा, और अगर वह गुनहगार था तो उसकी बुराइयों से दरगुज़र फ़रमा।

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