रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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वित्र की नमाज़ में क़ुनूत की दुआ

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    اللهم اهدني فيمن هديت، وعافني فيمن عافيت، وتولني فيمن توليت، وبارك لي فيما أعطيت، وقني شر ما قضيت؛ فإنك تقضي ولا يقضى عليك، إنه لا يذل من واليت، [ولا يعز من عاديت]، تباركت ربنا وتعاليت.

    ऐ अल्लाह, मुझे हिदायत दे उन लोगों में जिन्हें तूने हिदायत दी, मुझे आफ़ियत दे उन लोगों में जिन्हें तूने आफ़ियत दी, मुझे अपना दोस्त बना उन लोगों में जिन्हें तूने दोस्त बनाया, जो कुछ तूने मुझे दिया उसमें बरकत दे, और जो फ़ैसला तूने किया उसके शर से मुझे बचा। बेशक तू ही फ़ैसला करता है और तेरे ख़िलाफ़ कोई फ़ैसला नहीं किया जा सकता; जिसे तू दोस्त बना ले वह ज़लील नहीं होता, [और जिसे तू दुश्मन बना ले वह इज़्ज़त नहीं पाता]। तू बरकत वाला है, ऐ हमारे रब, और बुलंद है।

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    اللهم إني أعوذ برضاك من سخطك، وبمعافاتك من عقوبتك، وأعوذ بك منك، لا أحصي ثناء عليك، أنت كما أثنيت على نفسك.

    ऐ अल्लाह, मैं तेरी नाराज़गी से तेरी रज़ा की पनाह माँगता हूँ, और तेरी सज़ा से तेरी माफ़ी की पनाह माँगता हूँ। मैं तुझसे तेरी ही पनाह माँगता हूँ। मैं तेरी तारीफ़ का शुमार नहीं कर सकता; तू वैसा ही है जैसी तूने ख़ुद अपनी तारीफ़ की है।

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    اللهم إياك نعبد، ولك نصلي ونسجد، وإليك نسعى ونحفد، نرجو رحمتك، ونخشى عذابك، إن عذابك بالكافرين ملحق. اللهم إنا نستعينك، ونستغفرك، ونثني عليك الخير، ولا نكفرك، ونؤمن بك، ونخضع لك، ونخلع من يكفرك.

    ऐ अल्लाह, हम सिर्फ़ तेरी ही इबादत करते हैं, तेरे ही लिए नमाज़ पढ़ते और सजदा करते हैं, और तेरी ही ख़िदमत की तरफ़ दौड़ते हैं। हम तेरी रहमत की उम्मीद रखते हैं और तेरी सज़ा से डरते हैं; बेशक तेरी सज़ा काफ़िरों को पहुँचने वाली है। ऐ अल्लाह, हम तुझसे मदद माँगते हैं, तुझसे माफ़ी माँगते हैं, हर भलाई के साथ तेरी तारीफ़ करते हैं, और तेरा इनकार नहीं करते। हम तुझ पर ईमान लाते हैं, तेरे आगे झुकते हैं, और जो तेरा इनकार करे उससे बेज़ारी ज़ाहिर करते हैं।

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