اللهم إني أعوذ بك من عذاب القبر، ومن عذاب جهنم، ومن فتنة المحيا والممات، ومن شر فتنة المسيح الدجال.
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ क़ब्र के अज़ाब से, जहन्नम के अज़ाब से, ज़िंदगी और मौत के फ़ितनों से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने की बुराई से।
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اللهم إني أعوذ بك من عذاب القبر، وأعوذ بك من فتنة المسيح الدجال، وأعوذ بك من فتنة المحيا والممات. اللهم إني أعوذ بك من المأثم والمغرم.
ऐ अल्लाह, मैं क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह माँगता हूँ, और मसीह दज्जाल के फ़ितने से तेरी पनाह माँगता हूँ, और ज़िंदगी और मौत के फ़ितनों से तेरी पनाह माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, मैं गुनाह और क़र्ज़ से तेरी पनाह माँगता हूँ।
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اللهم إني ظلمت نفسي ظلما كثيرا، ولا يغفر الذنوب إلا أنت، فاغفر لي مغفرة من عندك وارحمني، إنك أنت الغفور الرحيم.
ऐ अल्लाह, मैंने अपनी जान पर बहुत ज़ुल्म किया, और तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ़ नहीं करता। तो अपनी तरफ़ से मुझे माफ़ी अता फ़रमा, और मुझ पर रहम फ़रमा। बेशक तू ही बहुत माफ़ करने वाला, निहायत रहम करने वाला है।
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اللهم اغفر لي ما قدمت، وما أخرت، وما أسررت، وما أعلنت، وما أسرفت، وما أنت أعلم به مني. أنت المقدم، وأنت المؤخر لا إله إلا أنت.
ऐ अल्लाह, मुझे माफ़ कर दे जो मैंने पहले किया और जो आगे करूँ, जो मैंने छुपाकर किया और जो खुलेआम किया, जो मैंने हद से बढ़कर किया, और जिसे तू मुझसे ज़्यादा जानता है। तू ही आगे करने वाला है और तू ही पीछे करने वाला है; तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं।
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اللهم أعني على ذكرك، وشكرك، وحسن عبادتك.
ऐ अल्लाह, अपने ज़िक्र, अपने शुक्र और अपनी अच्छी तरह इबादत करने में मेरी मदद फ़रमा।
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اللهم إني أعوذ بك من البخل، وأعوذ بك من الجبن، وأعوذ بك من أن أرد إلى أرذل العمر، وأعوذ بك من فتنة الدنيا وعذاب القبر.
ऐ अल्लाह, मैं कंजूसी से तेरी पनाह माँगता हूँ, और बुज़दिली से तेरी पनाह माँगता हूँ, और निकम्मे बुढ़ापे की तरफ़ लौटाए जाने से तेरी पनाह माँगता हूँ, और दुनिया के फ़ितने और क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह माँगता हूँ।
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اللهم إني أسألك الجنة وأعوذ بك من النار.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे जन्नत का सवाल करता हूँ और जहन्नम से तेरी पनाह माँगता हूँ।
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اللهم بعلمك الغيب وقدرتك على الخلق أحيني ما علمت الحياة خيرا لي، وتوفني إذا علمت الوفاة خيرا لي، اللهم إني أسألك خشيتك في الغيب والشهادة، وأسألك كلمة الحق في الرضا والغضب، وأسألك القصد في الغنى والفقر، وأسألك نعيما لا ينفد، وأسألك قرة عين لا تنقطع، وأسألك الرضا بعد القضاء، وأسألك برد العيش بعد الموت، وأسألك لذة النظر إلى وجهك، والشوق إلى لقائك في غير ضراء مضرة، ولا فتنة مضلة، اللهم زينا بزينة الإيمان، واجعلنا هداة مهتدين.
ऐ अल्लाह, तेरे ग़ैब के इल्म और मख़लूक़ पर तेरी क़ुदरत के वास्ते से, मुझे तब तक ज़िंदा रख जब तक तू ज़िंदगी को मेरे लिए बेहतर जाने, और मुझे मौत दे जब तू मौत को मेरे लिए बेहतर जाने। ऐ अल्लाह, मैं तुझसे छुपे और खुले में तेरे डर का सवाल करता हूँ, और ख़ुशी और ग़ुस्से में हक़ बात का सवाल करता हूँ, और ग़रीबी और अमीरी में मियानारवी का सवाल करता हूँ, और ऐसी नेमत का सवाल करता हूँ जो कभी ख़त्म न हो, और आँखों की ऐसी ठंडक का सवाल करता हूँ जो कभी न टूटे, और तक़दीर के फ़ैसले के बाद रज़ामंदी का सवाल करता हूँ, और मौत के बाद अच्छी ज़िंदगी का सवाल करता हूँ, और तेरे चेहरे के दीदार की लज़्ज़त का, और तुझसे मुलाक़ात के शौक़ का सवाल करता हूँ, बग़ैर किसी तकलीफ़देह मुसीबत या गुमराह करने वाले फ़ितने के। ऐ अल्लाह, हमें ईमान की ज़ीनत से सजा दे और हमें हिदायत पाने वाले और हिदायत देने वाले बना दे।
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اللهم إني أسألك يا ألله بأنك الواحد الأحد الصمد الذي لم يلد ولم يولد، ولم يكن له كفوا أحد، أن تغفر لي ذنوبي إنك أنت الغفور الرحيم.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे सवाल करता हूँ, ऐ अल्लाह, जो एक है, अकेला है, अस-समद है (ऐसा बेनियाज़ मालिक जिसकी सारी मख़लूक़ मोहताज है), जिसने न किसी को जना और न वह जना गया, और कोई उसके बराबर नहीं, कि तू मेरे गुनाह माफ़ कर दे। बेशक तू ही बहुत माफ़ करने वाला, निहायत रहम करने वाला है।
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اللهم إني أسألك بأن لك الحمد لا إله إلا أنت وحدك لا شريك لك، المنان، يا بديع السموات والأرض يا ذا الجلال والإكرام، يا حي يا قيوم إني أسألك الجنة وأعوذ بك من النار.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे सवाल करता हूँ, क्योंकि सारी तारीफ़ तेरे ही लिए है; तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई शरीक नहीं, ऐ बहुत देने वाले, ऐ आसमानों और ज़मीन को बग़ैर किसी मिसाल के पैदा करने वाले, ऐ जलाल और इकराम वाले, ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले, ऐ सबको क़ायम रखने वाले, मैं तुझसे जन्नत का सवाल करता हूँ और जहन्नम से तेरी पनाह माँगता हूँ।
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اللهم إني أسألك بأني أشهد أنك أنت الله لا إله إلا أنت الأحد الصمد الذي لم يلد ولم يولد ولم يكن له كفوا أحد.
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे सवाल करता हूँ, यह गवाही देते हुए कि तू ही अल्लाह है, तेरे सिवा कोई इबादत का हक़दार नहीं, जो एक है, अस-समद है, जिसने न किसी को जना और न वह जना गया, और कोई उसके बराबर नहीं।