रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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नमाज़ की शुरुआती दुआ (इस्तिफ़्ताह)

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    اللهم باعد بيني وبين خطاياي كما باعدت بين المشرق والمغرب، اللهم نقني من خطاياي كما ينقى الثوب الأبيض من الدنس، اللهم اغسلني من خطاياي، بالثلج والماء والبرد.

    ऐ अल्लाह, मेरे और मेरे गुनाहों के बीच इतनी दूरी कर दे जितनी दूरी तूने पूरब और पश्चिम के बीच की है। ऐ अल्लाह, मुझे मेरे गुनाहों से ऐसे पाक कर दे जैसे सफ़ेद कपड़ा मैल से पाक किया जाता है। ऐ अल्लाह, मेरे गुनाहों को बर्फ़, पानी और ओलों से धो दे।

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    سبحانك اللهم وبحمدك، وتبارك اسمك، وتعالى جدك، ولا إله غيرك.

    ऐ अल्लाह, तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है। तेरा नाम बरकत वाला है और तेरी शान बुलंद है। तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।

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    وجهت وجهي للذي فطر السموات والأرض حنيفا وما أنا من المشركين، إن صلاتي، ونسكي، ومحياي، ومماتي لله رب العالمين، لا شريك له وبذلك أمرت وأنا من المسلمين. اللهم أنت الملك لا إله إلا أنت، أنت ربي وأنا عبدك، ظلمت نفسي واعترفت بذنبي فاغفر لي ذنوبي جميعا إنه لا يغفر الذنوب إلا أنت. واهدني لأحسن الأخلاق لا يهدي لأحسنها إلا أنت، واصرف عني سيئها، لا يصرف عني سيئها إلا أنت، لبيك وسعديك، والخير كله بيديك، والشر ليس إليك، أنا بك وإليك، تباركت وتعاليت، أستغفرك وأتوب إليك.

    मैंने ख़ालिस ईमान वाला (हनीफ़) बनकर अपना चेहरा उसकी तरफ़ कर लिया जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया, और मैं अल्लाह के साथ शरीक ठहराने वालों में से नहीं हूँ। बेशक मेरी नमाज़, मेरी क़ुर्बानी (इबादत), मेरा जीना और मेरा मरना अल्लाह के लिए है जो सारे जहानों का रब है, उसका कोई शरीक नहीं। मुझे इसी का हुक्म दिया गया है, और मैं फ़रमाँबरदारों (मुसलमानों) में से हूँ। ऐ अल्लाह, तू ही बादशाह है, तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तू मेरा रब है और मैं तेरा बंदा हूँ। मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया और अपने गुनाह का इक़रार किया, तो मेरे सारे गुनाह माफ़ कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ़ नहीं करता। मुझे सबसे अच्छे अख़लाक़ की राह दिखा, क्योंकि तेरे सिवा कोई उनकी राह नहीं दिखाता, और बुरे अख़लाक़ को मुझसे दूर कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई उन्हें दूर नहीं करता। मैं हाज़िर हूँ, तेरी ख़िदमत में, तेरी इताअत के लिए तैयार; सारी भलाई तेरे हाथों में है, और बुराई की निस्बत तेरी तरफ़ नहीं। मैं तेरे ही सहारे हूँ और तेरी ही तरफ़ (लौटना) है। तू बरकत वाला और बुलंद है। मैं तुझसे माफ़ी माँगता हूँ और तेरी तरफ़ तौबा करता हूँ।

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    اللهم رب جبرائيل، وميكائيل، وإسرافيل، فاطر السموات والأرض، عالم الغيب والشهادة أنت تحكم بين عبادك فيما كانوا فيه يختلفون. اهدني لما اختلف فيه من الحق بإذنك إنك تهدي من تشاء إلى صراط مستقيم.

    ऐ अल्लाह, जिब्रील, मीकाईल और इस्राफ़ील के रब, आसमानों और ज़मीन को पैदा करने वाले, ग़ैब और ज़ाहिर के जानने वाले, तू अपने बंदों के बीच उन बातों का फ़ैसला करता है जिनमें वे इख़्तिलाफ़ करते थे। जिस हक़ में इख़्तिलाफ़ किया गया है उसमें अपनी इजाज़त से मेरी रहनुमाई फ़रमा, बेशक तू जिसे चाहता है सीधे रास्ते की हिदायत देता है।

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    الله أكبر كبيرا، الله أكبر كبيرا، الله أكبر كبيرا، والحمد لله كثيرا، والحمد لله كثيرا، والحمد لله كثيرا، وسبحان الله بكرة وأصيلا)) ثلاثا ((أعوذ بالله من الشيطان: من نفخه، ونفثه، وهمزه.

    अल्लाह सबसे बड़ा है, बहुत बड़ा (तीन बार), और तमाम तारीफ़ अल्लाह के लिए है, बहुत ज़्यादा (तीन बार), और अल्लाह पाक है सुबह और शाम (तीन बार)। मैं शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ: उसकी फूँक (घमंड) से, उसके फूँकने (शायरी/उकसाने) से, और उसके दीवाना कर देने वाले वसवसे से।

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    اللهم لك الحمد، أنت نور السموات والأرض ومن فيهن، ولك الحمد أنت قيم السموات والأرض ومن فيهن، [ولك الحمد أنت رب السموات والأرض ومن فيهن] [ولك الحمد لك ملك السموات والأرض ومن فيهن] [ولك الحمد أنت ملك السموات والأرض] [ولك الحمد] [أنت الحق، ووعدك الحق، وقولك الحق، ولقاؤك الحق، والجنة حق، والنار حق، والنبيون حق، ومحمد صلى الله عليه وسلم حق، والساعة حق] [اللهم لك أسلمت، وعليك توكلت، وبك آمنت، وإليك أنبت، وبك خاصمت، وإليك حاكمت. فاغفر لي ما قدمت، وما أخرت، وما أسررت، وما أعلنت] [وما أنت أعلم به مني] [أنت المقدم، وأنت المؤخر لا إله إلا أنت] [أنت إلهي لا إله إلا أنت] [ولا حول ولا قوة إلا بالله].

    ऐ अल्लाह, तेरे ही लिए सारी तारीफ़ है। तू आसमानों और ज़मीन और जो कुछ उनमें है उन सबका नूर है, और तेरे ही लिए सारी तारीफ़ है, तू आसमानों और ज़मीन और जो कुछ उनमें है उन सबको क़ायम रखने वाला है। [और तेरे ही लिए सारी तारीफ़ है, तू आसमानों और ज़मीन और जो कुछ उनमें है उन सबका रब है।] [और तेरे ही लिए सारी तारीफ़ है, आसमानों और ज़मीन और जो कुछ उनमें है उन सबकी बादशाहत तेरी ही है।] [और तेरे ही लिए सारी तारीफ़ है, तू आसमानों और ज़मीन का बादशाह है।] [और तेरे ही लिए सारी तारीफ़ है।] [तू हक़ है, तेरा वादा हक़ है, तेरी बात हक़ है, तुझसे मुलाक़ात हक़ है, जन्नत हक़ है, जहन्नम हक़ है, नबी हक़ हैं, मुहम्मद (उन पर अल्लाह की रहमत और सलाम हो) हक़ हैं, और क़यामत हक़ है।] [ऐ अल्लाह, मैं तेरा ही फ़रमाँबरदार हुआ, तुझ पर ही ईमान लाया, तुझ पर ही भरोसा किया, तेरी ही तरफ़ रुजू किया, तेरी ही मदद से (मुख़ालिफ़ों से) झगड़ा किया, और तुझ ही से फ़ैसला चाहा। तो मुझे माफ़ कर दे जो मैंने पहले किया और जो बाद में करूँगा, जो मैंने छुपाया और जो ज़ाहिर किया।] [और जिसे तू मुझसे ज़्यादा जानता है।] [तू ही आगे करने वाला है और तू ही पीछे करने वाला है; तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।] [तू मेरा माबूद है; तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।] [और अल्लाह के सिवा न कोई ताक़त है और न कोई क़ुव्वत।]

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