रफ़ीक़ अल-मुस्लिम
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नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत

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    قال النبي صلى الله عليه وسلم: ((من صلى علي صلاة صلى الله عليه بها عشرا)).

    नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "जो मुझ पर एक बार दुरूद भेजे, अल्लाह उस पर दस रहमतें नाज़िल करता है।"

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    وقال صلى الله عليه وسلم: ((لا تجعلوا قبري عيدا وصلوا علي؛ فإن صلاتكم تبلغني حيث كنتم)).

    और आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "मेरी क़ब्र को मेला (जश्न की जगह) न बनाओ, और मुझ पर दुरूद भेजो, क्योंकि तुम जहाँ भी हो तुम्हारा दुरूद मुझ तक पहुँचता है।"

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    وقال صلى الله عليه وسلم: ((البخيل من ذكرت عنده فلم يصل علي)).

    और आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "कंजूस वह है जिसके सामने मेरा ज़िक्र हो और वह मुझ पर दुरूद न भेजे।"

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    وقال صلى الله عليه وسلم:((إن لله ملائكة سياحين في الأرض يبلغوني من أمتي السلام)).

    और आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "अल्लाह के कुछ फ़रिश्ते हैं जो ज़मीन में घूमते रहते हैं और मेरी उम्मत की तरफ़ से मुझे सलाम पहुँचाते हैं।"

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    وقال صلى الله عليه وسلم: ((ما من أحد يسلم علي إلا رد الله علي روحي حتى أرد عليه السلام)).

    और आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: "जो कोई भी मुझे सलाम करता है, अल्लाह मेरी रूह मुझ पर लौटा देता है ताकि मैं उसके सलाम का जवाब दूँ।"

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