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يكبر على كل شرف ثلاث تكبيرات ثم يقول: لا إله إلا الله وحده لا شريك له، له الملك، وله الحمد، وهو على كل شيء قدير، آيبون، تائبون، عابدون، لربنا حامدون، صدق الله وعده، ونصر عبده، وهزم الأحزاب وحده.
आप हर ऊँचाई [रास्ते की चढ़ाई] पर तीन बार तकबीर कहते, फिर कहते: अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी की बादशाही है और उसी की तारीफ़ है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। हम लौटने वाले हैं, तौबा करने वाले, इबादत करने वाले, अपने रब की हम्द करने वाले। अल्लाह ने अपना वादा सच्चा कर दिखाया, अपने बंदे की मदद की, और अकेले ही (दुश्मनों के) गिरोहों को हरा दिया।
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