بِسْمِ اللهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيم اللّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لاَ تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلاَ نَوْمٌ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلاَّ بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلاَ يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلاَّ بِمَا شَاء وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالأَرْضَ وَلاَ يَؤُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ.
अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम करने वाला है। अल्लाह — उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला, [सारी] कायनात को क़ायम रखने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके पास सिफ़ारिश कर सके? वह जानता है जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है, और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का भी अहाता नहीं कर सकते सिवाय उसके जो वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन पर छाई हुई है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं। और वही सबसे बुलंद, सबसे अज़ीम है।
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